भुवनेश्वर, July 14, 2026: भारत भर की महिलाओं और किशोरियों के लिए मासिक धर्म (माहवारी) जीवन का एक स्वाभाविक हिस्सा होने के बावजूद, स्वास्थ्य से जुड़े उन विषयों में से एक है जिन पर सबसे कम बात होती है। सामाजिक झिझक, ग़लत जानकारी और संकोच के कारण इस पर खुलकर चर्चा नहीं हो पाती। नतीजतन, कई किशोरियाँ इसके लिए तैयार नहीं हो पातीं और कई महिलाएँ अपने स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं पर सलाह लेने में हिचकिचाती हैं।
इस चुनौती को पहचानते हुए, वेदांता एल्युमिनियम झारसुगुड़ा और सुंदरगढ़ ज़िलों में अपनी कुरालोई, जामखानी और घोघरपल्ली कोल माइंस के आसपास के समुदायों में ‘प्रोजेक्ट आरोग्यम’ के माध्यम से निवारक स्वास्थ्य सेवा (प्रिवेंटिव हेल्थकेयर) और जागरूकता को बढ़ावा दे रहा है। इसी क्रम में कंपनी ने हाल ही में एक सप्ताह तक चलने वाला मासिक धर्म स्वच्छता जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया, जिसके तहत विशेषज्ञों द्वारा संचालित सत्रों के ज़रिए 670 से अधिक महिलाओं और किशोरियों तक पहुँच बनाई गई। इन सत्रों में मासिक धर्म स्वच्छता, पोषण, दर्द प्रबंधन और टिकाऊ (सस्टेनेबल) मासिक धर्म उत्पादों जैसे विषयों पर जानकारी दी गई, ताकि प्रतिभागी भ्रांतियों को छोड़कर सही जानकारी के आधार पर निर्णय ले सकें। कार्यक्रम में एक विशेष सांस्कृतिक पहलू भी जोड़ा गया — रजो पर्व (राजा फेस्टिवल) से जुड़ी ओडिशा की पारंपरिक ‘अल्ता’ रस्म को शामिल किया गया, जो नारीत्व का उत्सव मनाने के साथ-साथ यह संदेश भी देती है कि मासिक धर्म जीवन का एक स्वाभाविक हिस्सा है।
कुरालोई गाँव की चौदह वर्षीय बेबिना साहू ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा, “पहले मैं मासिक धर्म के बारे में सिर्फ़ स्कूल की किताबों से ही जानती थी। इस सत्र में शामिल होने के बाद मैंने समझा कि मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता बनाए रखना, सैनिटरी पैड का सही तरीके से इस्तेमाल करना और ज़रूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लेना कितना ज़रूरी है। अब मैं अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखने को लेकर पहले से कहीं ज़्यादा आत्मविश्वास महसूस करती हूँ।”
ऐसी पहलों के महत्व पर ज़ोर देते हुए, लखनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्त्री रोग विशेषज्ञ (गायनैकोलॉजिस्ट) डॉ. राहुल साहू ने कहा, “मासिक धर्म से जुड़े स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाना, महिलाओं और किशोरियों को सशक्त बनाने के सबसे प्रभावी तरीकों में से एक है। इस तरह की पहलें उन्हें सही जानकारी के आधार पर निर्णय लेने में सक्षम बनाती हैं और समुदायों को मासिक धर्म से जुड़ी सामाजिक झिझक से बाहर निकलने में मदद करती हैं।”
इस पहल के बारे में बात करते हुए, वेदांता एल्युमिनियम कोल माइंस के CEO अमरेस कुमार ने कहा, “वेदांता एल्युमिनियम कोल माइंस में हमारा मानना है कि समुदायों का सशक्तिकरण जानकारी और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच से शुरू होता है। ‘प्रोजेक्ट आरोग्यम’ के माध्यम से हम ऐसे सुरक्षित मंच तैयार कर रहे हैं, जहाँ महिलाएँ और किशोरियाँ मासिक धर्म से जुड़े स्वास्थ्य पर खुलकर बात कर सकें, सही निर्णय ले सकें और स्वस्थ जीवन जी सकें। आज जागरूकता बढ़ाकर हम आने वाले कल के लिए मज़बूत और सक्षम समुदायों का निर्माण कर रहे हैं।”
समुदाय स्तर पर काम करने के साथ-साथ, ‘प्रोजेक्ट आरोग्यम’ स्कूली बच्चों के बीच किशोरावस्था (प्यूबर्टी) और मासिक धर्म स्वास्थ्य पर खुली बातचीत को भी बढ़ावा दे रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में इस पहल के तहत विशेष जागरूकता सत्रों के ज़रिए झारसुगुड़ा और सुंदरगढ़ ज़िलों के 1,400 से अधिक विद्यार्थियों तक पहुँच बनाई गई। लड़कियों और लड़कों, दोनों को हीटिंग पैड और किशोरावस्था से जुड़ी जानकारीपूर्ण पुस्तकें वितरित की गईं, ताकि उन्हें उम्र के अनुरूप और सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील जानकारी मिल सके और उनमें जागरूकता, समझ तथा आत्मविश्वास विकसित हो।
मासिक धर्म स्वच्छता जागरूकता कार्यक्रम ‘प्रोजेक्ट आरोग्यम’ के व्यापक प्रभाव का ही एक हिस्सा है। इस परियोजना ने मोबाइल हेल्थ यूनिट, विशेषज्ञ चिकित्सा शिविरों और निवारक स्वास्थ्य पहलों के माध्यम से झारसुगुड़ा और सुंदरगढ़ में 50,000 से अधिक लोगों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डाला है।
इन प्रयासों को वेदांता एल्युमिनियम की कोल माइनिंग परिचालन क्षेत्रों के आसपास चलाई जा रही व्यापक सामुदायिक विकास पहलों से और बल मिलता है, जिनके ज़रिए 26 गाँवों में 2 लाख से अधिक लोगों तक पहुँच बनाई गई है।
वेदांता एल्युमिनियम स्वास्थ्य, शिक्षा, आजीविका, बुनियादी ढाँचे और सामाजिक विकास के क्षेत्र में केंद्रित प्रयासों के माध्यम से ओडिशा में विकास को लगातार समर्थन दे रहा है, और दीर्घकालिक प्रभाव पैदा करने के लिए स्थानीय हितधारकों के साथ मिलकर काम कर रहा है। ये प्रयास समावेशी विकास और ज़मीनी स्तर पर लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के प्रति कंपनी की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

